दुर्घटना ने छीनी रोज़ी–रोटी, आज भी कच्चे आशियाने में रहने को मजबूर आदिवासी युवक।

पीएम आवास योजना से वंचित पीड़ित ने कलेक्टर से लगाई गुहार

हंडिया ।तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत हंडिया के एक आदिवासी युवक की पीड़ा प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। कोरकू जनजाति से संबंध रखने वाले शिवनारायण छापा ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) के तहत पक्का मकान दिलाए जाने की मांग को लेकर कलेक्टर हरदा को लिखित आवेदन सौंपा है।

आवेदनकर्ता शिवनारायण छापा ने बताया कि लगभग एक वर्ष पूर्व एक गंभीर दुर्घटना (एक्सीडेंट) में वह शारीरिक रूप से असमर्थ हो गया, जिसके बाद मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करना भी संभव नहीं रह गया। आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि वह आज भी अपने परिवार के साथ कच्ची झोपड़ी में जीवन यापन करने को मजबूर है।

पीड़ित ने आवेदन में उल्लेख किया है कि उसका वर्तमान आवास बरसात, ठंड और भीषण गर्मी में पूरी तरह असुरक्षित है। न तो उसके पास पक्का मकान है और न ही आय का कोई स्थायी स्रोत।

पारिवारिक वार्षिक आय बेहद कम होने के कारण वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आता है।शिवनारायण छापा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के सभी पात्रता मापदंडों को पूरा करता है, इसके बावजूद अब तक उसे योजना का लाभ नहीं मिल पाया।

उसने प्रशासन से विशेष परिस्थिति (दुर्घटना एवं शारीरिक अक्षमता) को ध्यान में रखते हुए पीएमएवाई-जी के अंतर्गत पक्का आवास स्वीकृत करने की मांग की है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन ऐसे वास्तविक जरूरतमंद को समय रहते न्याय दिलाएगा? या फिर सरकारी योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगी?

पीड़ित परिवार को अब जिला प्रशासन से शीघ्र निर्णय और राहत की आस है।

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